Hier, 13:16
मैं सुबह उठता हूँ, चाय बनाता हूँ और अपना लैपटॉप खोलता हूँ। बाहर दुनिया ऑफिस जाने की जल्दी में होती है, लेकिन मेरा ऑफिस यहीं है, इसी टेबल पर। कोई बॉस नहीं, कोई सैलरी कैप नहीं। बस मैं और मेरा दिमाग। मेरे लिए कैसीनो कोई शौक या मनोरंजन नहीं है, यह मेरा पेशा है। जैसे एक शतरंज का खिलाड़ी अपनी चालें सोचता है, वैसे ही मैं हर दांव की संभावनाएं गणना करता हूँ। आज का दिन कैसा रहेगा, यह मैं पहले से नहीं जानता, लेकिन मुझे अपनी रणनीति पर भरोसा है। मैंने अपने सिस्टम में लॉग इन किया और एक बार फिर से वो प्रक्रिया शुरू हुई जिसे मैं हज़ारों बार कर चुका हूँ: vavada enter। यह सिर्फ एक वेबसाइट नहीं है, यह मेरा अखाड़ा है, जहाँ मैं हर रोज़ कमाई के लिए उतरता हूँ।
पिछले हफ्ते मेरा एक दोस्त मुझसे मिलने आया था। उसने मुझे लैपटॉप पर गेम खेलते देखा तो बोला, "यार, ये तो जुआ है, इसमें तो लोग सब कुछ हार जाते हैं।" मैं हँस दिया। उसे समझाना मुश्किल है। हाँ, जो लोग भावनाओं में बहकर खेलते हैं, वो हारते हैं। लेकिन मैं? मैं भावनाओं को दरवाजे के बाहर छोड़ देता हूँ। मेरे पास एक सख्त बैंकरोल है, एक समय-सीमा है, और सबसे जरूरी, एक निकास योजना है। मैं ब्लैकजैक का खिलाड़ी हूँ। यह एकमात्र ऐसा खेल है जहाँ गणित आपके पक्ष में काम कर सकता है, बशर्ते आम आदमी की गलतियाँ न करें। मैं कार्ड्स गिनता हूँ। हाँ, यह मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। पूरे दिन अभ्यास करो, हर छोटे से छोटे कार्ड पर नज़र रखो, और फिर यह एक आदत बन जाती है।
उस दिन, मैंने लाइव डीलर वाला ब्लैकजैक खोला। एक पेशेवर होने के नाते, मुझे लाइव गेम ज़्यादा पसंद हैं। आरएनजी (रैंडम नंबर जनरेटर) वाले गेम में कभी-कभी शक होता है, लेकिन असली डीलर के सामने, गणित ही असली हथियार है। शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले कुछ हाथों में मैं लगातार हार रहा था। डीलर के पास लगातार 20 आ रहे थे, मेरे पास 16। एक आम खिलाड़ी इस समय घबरा जाता, दांव दोगुना कर देता, या और पैसे जोड़ लेता। लेकिन मैंने अपनी सांसों पर नियंत्रण रखा। मैं जानता था कि यह उतार-चढ़ाव का हिस्सा है। मैंने अपना दांव वही रखा, बेसिक स्ट्रैटेजी पर टिका रहा। करीब 20 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा। मैं थोड़ा नीचे चला गया था, लेकिन मेरा दिमाग शांत था। फिर, धीरे-धीरे, पासा पलटने लगा।
मैंने देखा कि छोटे कार्ड्स (2-6) बहुत ज़्यादा निकल चुके थे। डेक में अब बड़े कार्ड्स (10, इक्के) का अनुपात ज़्यादा था। यही वो पल था जिसका मैं इंतज़ार कर रहा था। जब गिनती आपके पक्ष में हो, तो आपको दांव बढ़ाना होता है। मैंने अपना दांव चार गुना कर दिया। अगले हाथ में, मुझे ब्लैकजैक मिला। उसके अगले हाथ में, डीलर का अपने 15 पर कार्ड लेना जरूरी था और वह फट गया। अगले 15 मिनट में, मैंने न सिर्फ अपना नुकसान पूरा किया, बल्कि अच्छा-खासा मुनाफा भी कमा लिया। इसी तरह से काम करता है। यह कोई जादू नहीं, सिर्फ धैर्य और अनुशासन का खेल है।
कुछ लोग पूछते हैं, "इतना कॉन्फिडेंस कहाँ से आता है?" तो मैं कहता हूँ, अभ्यास से। मैंने हजारों घंटे सिर्फ यह समझने में बिताए हैं कि संभावनाएं कैसे काम करती हैं। हार एक विकल्प नहीं है, यह सिर्फ एक आँकड़ा है। आज मैं जीता, कल शायद हारूँ, लेकिन महीने के अंत में जोड़कर देखो तो मैं हमेशा प्लस में रहता हूँ। यही एक प्रोफेशनल और एक आम आदमी में फर्क है। आम आदमी आज के जीत-हार से खुश या दुखी होता है, प्रोफेशनल सिर्फ लॉन्ग टर्म गेम देखता है।
शाम होते-होते, मैंने अपना सेशन खत्म किया। मुनाफा अच्छा था, उतना ही जितना एक महीने पहले मैंने तय किया था कि इस महीने कमाना है। मैंने अपना अकाउंट चेक किया और विदड्रॉल का ऑप्शन दबाया। कुछ ही मिनटों में पैसा मेरे वॉलेट में आ गया। मैंने लैपटॉप बंद किया, खिड़की खोली और बाहर की हवा अंदर आने दी। दोस्तों के साथ शाम की चाय की प्लानिंग करनी है। काम खत्म हो गया। कैसीनो में एक और दिन, ऑफिस में एक और दिन की तरह बीत गया। बस फर्क इतना है कि इस ऑफिस में मैं अपना खुद का बॉस हूँ और यहाँ की कमाई का कोई ऊपरी हद नहीं है। बस दिमाग को शांत रखना है और अपने प्लान पर अमल करते रहना है।
पिछले हफ्ते मेरा एक दोस्त मुझसे मिलने आया था। उसने मुझे लैपटॉप पर गेम खेलते देखा तो बोला, "यार, ये तो जुआ है, इसमें तो लोग सब कुछ हार जाते हैं।" मैं हँस दिया। उसे समझाना मुश्किल है। हाँ, जो लोग भावनाओं में बहकर खेलते हैं, वो हारते हैं। लेकिन मैं? मैं भावनाओं को दरवाजे के बाहर छोड़ देता हूँ। मेरे पास एक सख्त बैंकरोल है, एक समय-सीमा है, और सबसे जरूरी, एक निकास योजना है। मैं ब्लैकजैक का खिलाड़ी हूँ। यह एकमात्र ऐसा खेल है जहाँ गणित आपके पक्ष में काम कर सकता है, बशर्ते आम आदमी की गलतियाँ न करें। मैं कार्ड्स गिनता हूँ। हाँ, यह मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। पूरे दिन अभ्यास करो, हर छोटे से छोटे कार्ड पर नज़र रखो, और फिर यह एक आदत बन जाती है।
उस दिन, मैंने लाइव डीलर वाला ब्लैकजैक खोला। एक पेशेवर होने के नाते, मुझे लाइव गेम ज़्यादा पसंद हैं। आरएनजी (रैंडम नंबर जनरेटर) वाले गेम में कभी-कभी शक होता है, लेकिन असली डीलर के सामने, गणित ही असली हथियार है। शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले कुछ हाथों में मैं लगातार हार रहा था। डीलर के पास लगातार 20 आ रहे थे, मेरे पास 16। एक आम खिलाड़ी इस समय घबरा जाता, दांव दोगुना कर देता, या और पैसे जोड़ लेता। लेकिन मैंने अपनी सांसों पर नियंत्रण रखा। मैं जानता था कि यह उतार-चढ़ाव का हिस्सा है। मैंने अपना दांव वही रखा, बेसिक स्ट्रैटेजी पर टिका रहा। करीब 20 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा। मैं थोड़ा नीचे चला गया था, लेकिन मेरा दिमाग शांत था। फिर, धीरे-धीरे, पासा पलटने लगा।
मैंने देखा कि छोटे कार्ड्स (2-6) बहुत ज़्यादा निकल चुके थे। डेक में अब बड़े कार्ड्स (10, इक्के) का अनुपात ज़्यादा था। यही वो पल था जिसका मैं इंतज़ार कर रहा था। जब गिनती आपके पक्ष में हो, तो आपको दांव बढ़ाना होता है। मैंने अपना दांव चार गुना कर दिया। अगले हाथ में, मुझे ब्लैकजैक मिला। उसके अगले हाथ में, डीलर का अपने 15 पर कार्ड लेना जरूरी था और वह फट गया। अगले 15 मिनट में, मैंने न सिर्फ अपना नुकसान पूरा किया, बल्कि अच्छा-खासा मुनाफा भी कमा लिया। इसी तरह से काम करता है। यह कोई जादू नहीं, सिर्फ धैर्य और अनुशासन का खेल है।
कुछ लोग पूछते हैं, "इतना कॉन्फिडेंस कहाँ से आता है?" तो मैं कहता हूँ, अभ्यास से। मैंने हजारों घंटे सिर्फ यह समझने में बिताए हैं कि संभावनाएं कैसे काम करती हैं। हार एक विकल्प नहीं है, यह सिर्फ एक आँकड़ा है। आज मैं जीता, कल शायद हारूँ, लेकिन महीने के अंत में जोड़कर देखो तो मैं हमेशा प्लस में रहता हूँ। यही एक प्रोफेशनल और एक आम आदमी में फर्क है। आम आदमी आज के जीत-हार से खुश या दुखी होता है, प्रोफेशनल सिर्फ लॉन्ग टर्म गेम देखता है।
शाम होते-होते, मैंने अपना सेशन खत्म किया। मुनाफा अच्छा था, उतना ही जितना एक महीने पहले मैंने तय किया था कि इस महीने कमाना है। मैंने अपना अकाउंट चेक किया और विदड्रॉल का ऑप्शन दबाया। कुछ ही मिनटों में पैसा मेरे वॉलेट में आ गया। मैंने लैपटॉप बंद किया, खिड़की खोली और बाहर की हवा अंदर आने दी। दोस्तों के साथ शाम की चाय की प्लानिंग करनी है। काम खत्म हो गया। कैसीनो में एक और दिन, ऑफिस में एक और दिन की तरह बीत गया। बस फर्क इतना है कि इस ऑफिस में मैं अपना खुद का बॉस हूँ और यहाँ की कमाई का कोई ऊपरी हद नहीं है। बस दिमाग को शांत रखना है और अपने प्लान पर अमल करते रहना है।

